February 26, 2024 11:58 pm

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सीपीआर की मदद से इमरजेंसी में बचा सकते हैं अपनों की ज़िंदगी – डॉ सुजीत सिंह


इच वन सेव वन ” के तहत डॉक्टर्स एवं आमजनमानस को दी गयी सीपीआर ट्रेनिंग

शारदा नारायण अस्पताल परिसर में सोसाइटी फॉर इमरजेंसी मेडिसिन इंडिया यूपी चैप्टर ,अलर्ट एनजीओ एवं शारदा नारायण अस्पताल के संयुक्त तत्वाधान में “बीएलएस” परीक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) डॉक्टर एवं आमजन लोगो को आपातकाल स्थिति में सीपीआर कैसे करे इस तकनीक के बारे में बताया गया। सीपीआर का फुल फॉर्म कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन है। यह इमरजेंसी मेडिकल टेक्निक है जिसके जरिए किसी व्यक्ति की सांस या दिल के रुक जाने पर उसकी जान बचाई जा सकती है। जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है, तो उसे कार्डिएक अरेस्ट होता है। कार्डिएक अरेस्ट के दौरान, हृदय मस्तिष्क और फेफड़ों सहित शरीर के बाकी हिस्सों में खून पंप नहीं कर सकता है। उपचार के बिना मृत्यु मिनटों में हो सकती है। सीपीआर में मरीज की छाती पर दबाव बनाया जाता है जिससे ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। उक्त बाते “अलर्ट संस्था चेन्नई” से आयी सीपीआर ट्रेनर रेखा श्रीकुमार ने कही।सोसाइटी फॉर इमरजेंसी मेडिसिन इंडिया यूपी चैप्टर के अध्यक्ष डॉ सुजीत सिंह ने बताया की पुरे उत्तर प्रदेश में “सेमि” द्वारा ऐसे अभियान चलाये जा रहे है और हमारा उद्येश्य है की हर घर में कम से कम एक लोग को सीपीआर देना आना चाहिए जिससे कार्डिएक अरेस्ट से होने वाली मृत्यु में कमी लायी जा सके। यदि कार्डियक अरेस्ट के पहले कुछ मिनटों में मरीज को सीपीआर दिया जाए, तो मरीज के जीवित रहने की संभावना को दोगुना या तिगुना हो सकती है। इस मौके पर शारदा नारायण अस्पताल के चैयरमेन डॉ संजय सिंह ,डॉ एकीका सिंह ,डॉ मधुलिका सिंह,डॉ राहुल कुमार,डॉ रुपेश के सिंह ,डॉ रेहान ,डॉ जहीरुद्दीन,डॉ फ़िरोज़ ,डॉ खालिद ,डॉ अरशद खान ,एवं समस्त स्टाफगण मौजूद रहे।

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